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15 Jun 2023 · 1 min read

तुम

अचछा,,अब चलूँ

कहकर,

मेरे हाथ पर से

अपनी हथेली,

हटाकर,

तुम चले गये।

पर, फिर, भी ,

रह गये मुझमे,

जैसे रह जाती है ,

तश्तरी में,

संतरे के छिलकों,

की खुशबू ,

पुदीने के

हरे पत्तो की महक

और हींग की गंध ,

तुम,समाये रहे मुझमें,

मै,जहां- जहां जाती हूं,

तुम साथ- साथ चलते हो ,

दुनियादारी के ,

सारे पहाड,

इसी तरह ,

चढ लिये है ,

तुम साथ हो,

ये,,ताकत है ,

बहुत बडी,

सब होता है ,

कितना,

आसान,

मन ,

जब- जब ,

महसूस करता

रहा है,

साथ

तुम्हारा

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