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15 Jun 2023 · 1 min read

मासूमियत

एक कठोर चेहरे वाली,

मेहनती औरत ,

रोज निकलती है ,

बाजार से,

उसके ,

पग फौलादी है ,

उसके चलने से,

सडक मे आवाज

आती है ,

जैसे कि,

सड़क, कहती हो ,

कि, सुन लो ,

औरतों,

ये,मासूमियत

अब अशुभ है

औरत के लिए

तुम नहीं जानती

वह कब तुम्हारी दुश्मन

बन जाएगी

और तुमको खत्म कर देगी ।

तुम देखती हो इस दुनिया को,

मासूम बनकर,

मगर जानती नही ,

बहुत सारे रूढिवादी

यही तो चाहते हैं

और इसीलिए

इस ,मासूमियत की

करते हैं ,

सराहना।

वे चाहते हैं ,

तुम ,इस मासूमियत के,

पहाड मे दबी रहो।

साथ ही यह सच है कि

वे भय खाते हैं ,

मजबूती से,

इसीलिए ,

मासूमियत ,

बस, जीव से ,

दया दिखाने को रखो,

गलत होता है ,

तो,

मत रोको,

अपने,

हृदय की

आवाज़ को,

अपनी नसों में

दौडते रक्त को,

महसूस करो।

ताला मत लगाओ,

इस ,जुबान पर,

किसी का,

अहित हो रहा है,

तब , उतार कर,

फेक दो ,

मासूमियत,

बन जाओ ,

वीरांगना ।

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