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15 Jun 2023 · 1 min read

जीवन रश्मि

जीवन रश्मि अब अपना रथ हांको
बह गये हिमकण अश्रु उन्हें आको
अब अपने नव जीवन को झांको
रह गया अगर संशय उसे त्यागो
कुछ और नहीं बस अब मानो
रह गया अधूरा जो तप है ठानो

इस धरा से गगन की ओर देखो
है रुख पवन का किस ओर देखो
राह अपनी स्वयं बनाकर जानो
शूल से आघातों से पार चलो
कुछ और नहीं सुनहरा पल देखो
आशाओं के पार नया मंजर देखो

जीवन में अनुभवों का कद देखो
विचलित मन का तुम खोल कपाट देखो
हर्षित कर जाते जो पल याद कर देखो
भर कर उत्साह तुम प्रयास कर देखो
छूकर ऊंचाई को आभास कर देखो
जीवन में नया प्रकाश तुम देखो

गहरे सागर में गोताखोर सा बन देखो
बहती नदी में लहर से लहरा कर देखो
रेगिस्तान में बहार का पैगाम बन देखो
कांटों भरे पेड़ पर गुलाब सा बन देखो
अब तुम सुनहरा भविष्य देखो
घनघोर घटा बीच तुम रवि बनकर देखो

नेहा
खैरथल अलवर (राजस्थान)

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