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15 Jun 2023 · 1 min read

शुरुआत तुम से है

बन सको तो बनो इंशान शुरुआत तुम से है
उखाड़ फेको नफ़रत यार बदलाव तुम से है

कब तक जाति मजहब से ग्रसित रहोगे तुम
हर चेहरे में एक चेहरा देखो इलाज तुम से है

उठाओ कलम और लिख डालो प्रेम गीत तुम
समाज में प्रेम की बयार का निज़ाम तुम से है

क़लम बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है कब समझोगे
समाज किस ओर बढ़े इसका अतराफ़ तुमसे है

वो जिनपे कुछ लिख नहीं पाया उन्हें पयाम मेरा
समझते नहीं हो क्या लिखूँ यार कुणाल तुम से है
@कुनु

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