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15 Jun 2023 · 1 min read

आओ न

करीब और करीब तुम मेरे, आओ न
संवाद नहीं तो कोई गीत, गुनगुनाओ न

ये रात युहीं कट जाएगी होठों पे तुम्हारे
सर्द जाने को है कुछ बात आगे, बढ़ाओ न

साँसों की डोर टूट रही न जाने कब से
इस प्यासे को झील की राह ,दिखाओ न

नहीं आता मुझे पढना प्रेम-अग्न प्रिय
आलिंगन में मुझे थोड़ा तो ,सिखाओ न

कसम से ये ग़ज़ल पूर्ण हो जाएगी मेरी
नेनों से तुम इसे एक बार पढ़, जाओ न

तकता रहूँगा उम्रभर युहीं एक टक तुम्हें
तुम खुले बाल में कोई बिंदी तो, लगाओ न
@कुनु

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