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15 Jun 2023 · 1 min read

बस कर

तिरे मुस्कुराते चेहरे पे दिल से कई अशआर कहा बस कर
तुझे रक़ीब के अलावा हमेशा कुछ भी ना दिखा बस कर

आज तीन साल बाद मैंने अनसुना किया तो रो पड़ी तुम
तुम्हें पुकारते पुकारते कभी चीख पड़ा था गला बस कर

मैं बेहया , खुदगर्ज़ , बे-ग़ैरत , काफिर ,जहर सब के सब
इससे ज़्यादा अबकी बार और कुछ भी ना सुना बस कर

तुमने कहा अलविदा मैंने मान लिया खुद को समझा लिया
अब दुबारा यूँ कहीं टकरा बुझे हुए चराग़ न जला बस कर

तुझसे इश्क है आजतक म’गर पाना नहीं तुझे किसी जमाने
ज़ुल्फ़-ए-परेशान से अब क्या होगा टूट चुका हर नशा बस कर

@कुनु

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