Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
14 Jun 2023 · 1 min read

करते बर्बादी दिखे , भोजन की हर रोज (कुंडलिया)

करते बर्बादी दिखे , भोजन की हर रोज (कुंडलिया)
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
करते बर्बादी दिखे , भोजन की हर रोज
किसने कितना प्लेट में ,छोड़ा करिए खोज
छोड़ा करिए खोज , फेंकते आधा खाना
दृश्य आजकल आम , दीखता है रोजाना
कहते रवि कविराय, प्लेट में दुगना धरते
भोजन का अपमान , देखिए कितने करते
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता :रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा ,रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99 9761 5451

Loading...