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13 Jun 2023 · 1 min read

असर

अब निशा की नीरवता
आधुनिकता की भव्यता को समर्पित होकर
सादगी भरे जीवन को मार रही ठोकर
पर चोट तो दिखती नही
वह बाजारों की तरह बिकती नही
वह तो अन्तर्मन की टीस है
झुंझलाते हुए मन की खीझ है
इसमे इमानदारी की पीडा और
मेहनत का संतोष है
पर उसका दुःख तो केवल तेरी
कुसंगति से पैदा दोष है
सोचता संस्कार मे ही कमी रह गयी
मां मन मे ममता भाव घर कर गयी
पर प्रयास की पराकाष्ठा बची है
मन ने सूर्योदय की रचना रची है
ज्ञान के भाव से ही चमत्कार होगा
समय पर ही समय का सत्कार होगा ।

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