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13 Jun 2023 · 1 min read

दोहावली ओम की

स्वर सम्राज्ञी लताजी , कर गईं महाप्रयाण ।
हृदयस्पर्शी गीत सुन , लौट आते थे प्राण ।।

सुर की ऐसी रागिनी , नहीं अब इस संसार ।
लता दीदी के बिना , लग रहा जगत असार ।।

सुरतान की ऐसी कला , कोई दूसरा ना। होय ।
सुन मीठी सुरतान को , होय मगन सब कोय ।।

ओमप्रकाश भारती ओम्

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