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12 Jun 2023 · 1 min read

गुनाहों की गौद मे पलता रहा इंसान

गुनाहों की गौद मे पलता रहा इंसान
सदी दर सदी यूहीं ढलता रहा इंसान

मिट्टी के कीड़ों ने हड्डियां भी न छोड़ीं
कब्र के अंधेरों मे गलता रहा इंसान

चीख मौत की कानों मे सुनाई देती रही
बेखबर बराबर चलता रहा इंसान

लाखों कत्ल हुए रोम जर्मन के हाथों
हुक्मे खुदा से फिर भी फलता रहा इंसान

चांद सी सिफत उसके मिज़ाज मे न थी
सदा सूरज की तरह जलता रहा इंसान
मारूफ आलम

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