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12 Jun 2023 · 1 min read

मसरूफ़

मसरूफ इस कदर है वो
वक़्त खैरियत का भी नहीं
ये दिल्लगी अच्छी भी है और
नागवार भी।।
चंद रोज़ हैं ज़िन्दगी के
क्या उन्हें पता नहीं
अनजान बनना ठीक है और
खुशगवार भी।।
-शालिनी मिश्रा तिवारी
( बहराइच, उ०प्र० )

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