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12 Jun 2023 · 1 min read

चाहत की गर्मी मे जलते क्यों नही

चाहत की गर्मी मे जलते क्यों नही
प्यार का मौसम है बदलते क्यों नहीं

बहुत कहते थे मीलों चल सकता हूँ
अब रूक क्यों गये चलते क्यों नहीं

देखो ये काफिले मुद्दतों से प्यासे हैं
तुम बर्फ हो तो पिघलते क्यों नहीं

बिक चुके थे तभी मैं सोचता था कि
शत्रु भी अब तुम्हें खलते क्यों नहीं

फरिश्ते ही होंगे जरा गौर से देखो तो
ये अगर इंसान हैं तो ढलते क्यों नहीं
मारूफ आलम

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