सपनों के सौदागर बने लोग देश का सौदा करते हैं
सपनों के सौदागर बने लोग देश का सौदा करते हैं
फिर उन सपनों से ही देश को नीचा दिखाते हैं
ऐसे सपनों से अपने को दूर रखो
क्योंकि झोला लेकर चलने वाले ही
झोला भरकर जाते हैं।
सद्कवि प्रेमदास वसु सुरेखा