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12 Jun 2023 · 1 min read

बदली ज़िंदगी

बदली ज़िंदगी

इस कदर बदली है ज़िंदगी
समय गुजरने के बाद
इक वक्त जैसे बेपनाह
फुर्सत के पल के साथ।

भावों का कुदरती प्रवाह
बेरोक टोक इस तरह बहा
सरोवर हो गई मन की उड़ान
भूल गई अपनी पहचान ।

ज़िंदगी कुछ बेमानी लगी
अपनी नहीं बेमानी लगी
कुछ कर गुजरने की चाह ने
बेताबी सी हर पल छाने लगी।

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