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12 Jun 2023 · 1 min read

सीख प्रकृति की –

सीख प्रकृति की –

बिखरी उषा की लालिमा
सूर्य उगा हुई भोर ।
पत्तों के झुरमुट में
पक्षी करे किलोल ।

अलग अलग पादप हैं
पत्तें हैं भरपूर।
हर पत्ता अलग है
अगर करें हम गौर।

रंग है एक हरा
पर है सब का जुदा
हल्का हरा , गहरा हरा
मेहंदी हरा ,फौजी हरा
पीतवर्णा, हरितवर्णा
तेज हरा ,शीत हरा ।

महकाए फूलों को
पर न दे अपना रंग
संग मिल के रहें
सब आकारों के संग।

छोटा पत्ता ,बड़ा पत्ता
नीम का पत्ता ,बड़ का पत्ता
सुंदर कोमल डाली पर
विशालकाय पेड़ की सत्ता ।

लंबे गिरते ,छोटे संभलते
छूए तो कुंभलाए ,
बलखाते चद जाए ।
लता पर वृक्ष पर
दीवार पर डाली पर ।

कभी गिरे सहारा ले रंग का
कभी सभी सहारा बने उस संग का ।
सब बड़े रंग बिखरे
हरियाली से मन लुभाएँ
शीतल पवन हरित किसलय के संग
खुशनुमा करे हर घर आँगन ।

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