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11 Jun 2023 · 1 min read

दायरे

दायरे
अपने दायरे हमने खुद बनाये
कुछ हालात ने मजबूर किया ,
कुछ हम खुद से ठहर गये।
पैर हमारे बेड़ियों में जकड़ गये ।
इनसे अब आज़ाद होना चाहिये ।
ठहरा पानी नहीं बहती धार होना चाहये ।

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