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11 Jun 2023 · 1 min read

त्रासदी

अभी तुम थे
अब तुम नहीं हो और
अब कभी नहीं मिलोगे
हमेशा के लिए कहीं खो गये हो
आसमान भी तो मुझे
रोज एक सा दिखता है पर
एक सा होता कहां है
हर पल सब कुछ बदलता रहता है
यह तो आंखों का धोखा होता है कि
हम आसमान को आसमान
समझते रहते हैं
जमीन को जमीन कहते हैं
मैं भी आसमान के
एक बादल के टुकड़े को
तुम्हारे नाम से पुकारती हूं
पर वह तो पलक झपकते ही
मेरी आंखों से ओझल होकर
कहीं दूर उड़ जाता है
मेरे आंगन बरसता भी नहीं
और कभी मेरे घर की
दहलीज के पार
बरस भी जाये तो
यह त्रासदी तो देखो कि
शायद वह मुझे पहचानता हो पर
मैं उसे पहचान नहीं पाती हूं।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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