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11 Jun 2023 · 1 min read

8- देश का उत्थान

देश का उत्थान

भ्रष्ट हों अधिकारी नेता, देश की न हो तरक्की ।

कुत्ते चाटते रहेंगे आटा, अंधी पिसती रहेगी चक्की ।।

हाईस्कूल इन्टर पास, यदि बनते हैं मन्त्री |

क्या है अन्तर योग्यता में, मन्त्री व सन्तरी।।

ईमानदारी है जरूरी, यदि चाहो देश का उत्थान।

योग्यता के अभाव में, देश न बने महान।।

जनता का जागरूक होना है जरूरी।

चुनाव में नेता के, ईमानदारी हो पूरी ।।

पार्टी बाज़ी गुटबाज़ी, न कोई विकल्प हो।

देश के उत्थान हेतु, यही संकल्प हो।।

योग्यता के बल पर हो, मंत्रालयों का आवंटन।

पार्टी के पक्ष या विपक्ष का, न हो कोई बन्धन।।

दागी भ्रष्टाचारी से, न हो काई वास्ता ।

सत्ता से दूर कर खोलो, बन्दीगृह का रास्ता।।

वैसे मुझे लगता है, केवल एक सपना।

पीढ़ियों का साधन, करते केवल नहीं अपना।।

कार्य अनैतिक करें होती नहीं आत्मग्लानि ।

आये यदि माल घर में, लगती नहीं कोई हानि ।।

देश का हो उत्थान, हमें सोच बदलनी होगी।

सन्तोष धन ग्रहण कर, हमें बनना होगा अल्प योगी।।

“दयानंद”

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