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11 Jun 2023 · 1 min read

15- चोर

चोर

नहीं कोई काम करना लेकर अच्छे की आशा ।

हराम की कमाई सदा पाने की लालसा।।

संकट की आती घड़ी मार्ग नहीं पाता।

गीदड़ की मौत आती गाँव में है जाता।।

चोरी करने को चोर रात भर जागता ।

सुख चैन गायब सब दिन भर भागता।।

रोटी पानी खाने को उन पर कोई समय नहीं ।

जीवन का कोई क्षण होता कभी अभय नहीं।।

माल बंटवारे में सदा होता विवाद रहे ।

मन सुकून नहीं दिल नाशाद रहे ।।

पकड़े यदि जायें खाते पुलिस की गोली |

सींकचों के अन्दर कटती दीवाली व होली ।।

रात-दिन डण्डे खाते और मोटी-मोटी रोटी।

अगर ये न करते काम, तो ये नौबत न होती।।

जीवन उनका नर्क बने घर की बर्बादी ।

जेल और मुकदमे से मिले न आज़ादी।।

बच्चे पत्नी त्रस्त रहें आमद का न साधन।

जमा-पूंजी खर्च हुई सूना हुआ आँगन।।

“दयानंद”

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