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11 Jun 2023 · 1 min read

ग़ज़ल

ग़ज़ल

नहीं कभी होते अकेले साथ चलती है कायनात
रात में तो नींद रहती ले चांद तारों की बारात

खुलती जब आंख तो प्रात का वंदन करें जब
हाथ में ले लालिमा सूर्य रश्मियां देती जवाब

रखें सदा दूरी बना कर निराशा हो या अवसाद
भीतर की वादियों में सुनें निरंतर अनहद नाद

जिंदगी के हों सुहाने रास्ते या कि हों तंग गलियां
जो मिले छोटा बड़ा कहते चलो सबको आदाब

जिधर भी चाहो तुम आंखें घुमा कर देख लो
नज़र आयेगी हमेशा अनोखी अजूबी करामात।

बांटना है कुछ अगर तो बस प्यार ही को बांटिए
नफरतों के नाकार से बनती नहीं कभी कोई बात।

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