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11 Jun 2023 · 1 min read

अदब

अदब से मिलना भी जरूरी है,
संस्कार की उच्च मुलकाता है अदब,
समाज में इज्ज़त दिलाता है अदब,
अदब- ए – खैरियत जरूरी है जनाब,
अदब से अल्लाह की खुशनुमारी है।
………….
अदब जीवन जीने का साऊर है,
अबद है तो रौशन है यह दुनिया।
बिना अदब के न संस्कार है और,
न शिष्टाचार न कोई इज्जत।

घोषणा: उक्त रचना मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है। यह रचना पहले फेसबुक पेज या व्हाट्स एप ग्रुप पर प्रकाशित नहीं हुई है।

डॉ प्रवीण ठाकुर
निगमित निकाय भारत सरकार।
शिमला हिमाचल प्रदेश।

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