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11 Jun 2023 · 1 min read

18- दिल की बात 2

दिल की बात 2

कर तुमसे स्नेह फूलों से प्यार

होती रही बसर यूँ ही मेरी ज़िन्दगी तमां॰,

सोने से इश्क न चाँदी से प्यार,

प्रज्जवलित रही सदा सन्तोष की शयाँ।।

बसने का देखा मैंने एक ख़्वाब दिल में आपके,

पर आपने दिल में मेरे,

है बना लिया अपना मकाँ ।

क्या कहूँ कहने को कुछ

बाकी नहीं है मेरे पास।

शब्दों के अभाव में

कुंठित हुई मेरी जुबाँ |

“दयानंद”

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