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11 Jun 2023 · 1 min read

G22

बेघर हुए शहर में तो गांवो में आ गए।
मुझको लगी जो धूप तो छांवो में आ गए।

ज़ुल्मो सितम के धूप से लाचार हो के हम।
हम तो तेरी दुआ के पनाहों में आ गए।

कांटे बिछाए जिसने हमारी जमीन पर।
हम फूल बन के उस की ही राहों में आ गए।

तूफान उनका कुछ भी बिगाड़े गा क्या “सगीर”?
जो खैर बनके मां की दुआओं में आ गए।

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