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22 Apr 2023 · 1 min read

ढलता सूरज वेख के यारी तोड़ जांदे

ढलता सूरज वेख के यारी तोड़ जांदे
लौकी क्यों अद् विचकारे छड़ जाते ,

जे यकीन न होंदा रब दी रहमत दा
पत्थर किवें पानी दे उत्ते तर जान्दे ।

जिगरा होवे जे गुरु गोविंद सिंह बरगा
हेक नल सवा सवा लख भी लड़ जादें

रख भरोसा उस रहबर दी रहमत दा
खोटे सिक्के भी इत्थे चल जान्दें ।।

✍️कवि दीपक सरल

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