ब्रेकअप
उसने वही कहा जो मुझे नहीं सुनना था.!
मुलाकात आखिरी थी शायद उसे यही कहना था.!!
ना आंखों में आंसू थे ना चहरे पर शिकन था,
शायद धूप तेज थी और मेरी आँखों में अंधेरा था.!!
वो मौत की तरह आयी, शरीर को छोड़ बाकी उठा कर ले गयी.!
कपड़े अभी गीले ही थे कि हवा आयी और उनसे गुजर गयी.!!
मैं बदहवास था मायूस था जैसे कस्ती की पतवार टूट गयी.!
अभी रात गुजरी ही थी कि फिर से रात हो गयी.!!
कुछ हंसे कुछ रोये और फिर उसी में मस्त हो गए.!
बसंत का मौसम था नए फूलों को देखकर खुश हो गए.!!