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20 Apr 2023 · 1 min read

दुआ कबूल नहीं हुई है दर बदलते हुए

दुआ कबूल नहीं हुई है दर बदलते हुए
मैं हार गया हूं बार-बार घर बदलते हुए

चिरागों की रोशनी को नीलाम किया है
अच्छा नहीं किया सूरज ने निकलते हुए

✍️कवि दीपक सरल

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