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19 Apr 2023 · 1 min read

लज्जा

मेरे देश के मज़दूर
मेरे मुल्क के किसान!
आख़िर क्यों इतने मजबूर
आखिर क्यों इतने परेशान!
कितने ज़्यादा बेरहम हैं
हमारे चुने हुए हुक़्मरान!
मैं सोचकर शर्मिंदा हूं
मैं देखकर हूं पशेमान!
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