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19 Apr 2023 · 1 min read

कुछ यादें अल्पांजली 2 से

काला मन जिसका हुआ,चढ़े न दूजो रंग।
जितना दूध पिलाइये,बदला कभी भुजंग।।

मैं खुद भुगतूं आप ही,उसकी जो हो रज़ा ।
तू काहे चिंता करे, अपनी गिन तू सज़ा ।।

चोर श्राप अब दे रहे,अल्लाह कर इंसाफ।
जिसके 2

उसके पूरे कर रहा , ईश्वर रोज़ हिसाब ।
सारे पन्ने फट गए, बिखरी कहीं किताब।।

संजय पाहूजा

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