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18 Apr 2023 · 1 min read

सफर की महोब्बत

सफर ऐसा की मंजिल का पता नहीं
मोहब्बत मे मुझे महबूब का पता नहीं
खुदा मुकमल हो तो सफर में वह मोड़ मिले
जहाँ मेरे महबूब का मुझको भी घर मिले

सफर में महबूब को कुछ बोल नहीं पाया
लफ्ज मे दिल के खोल भी नहीं पाया
उसे भी महोबत सच मे थी मुझसे तो
दिल के लफ्जो को समझ क्यो नहीं पाया

हमारा यह सफर यूही गुजर गया
महोब्बत मे वो ! कुछ ना कह पाया
लफ्जो से ! मे भी कुछ नहीं कह पाया
दिल का अरमां मे दिल मे रह गया

अनिल चौबिसा
9829246588

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