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17 Apr 2023 · 1 min read

तुम याद आ गये

छाई काली घटा,तुम याद आ गये।
किसने दी सदा, तुम याद आ गये।

बारिश की बूंदों का टिप टिप गिरना,
थोड़ा फिसलना,और फिर संभलना ,
जब चली ठंडी हवा,तुम याद आ गये।

एक छतरी नीचे, दोनों का साथ चलना
हाथ छूते ही‌ , थोड़ा सा फिर सिमटना
ऐसे में हमनवां,तुम याद आ गये।

क्यों और क्यूं हुआ ,तेरा मेरा यूं बिछड़ना
न मुलाकात कोई, बस सिर्फ तडपना,
अब तो मिला दें खुदा,तुम याद आ गये

सुरिंदर कौर

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