Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
17 Apr 2023 · 1 min read

बुराइयां हैं बहुत आदमी के साथ

मेरी तो उम्र कटी लेखनी के साथ
तेरी भी उम्र कटे शायरी के साथ

फ़रेबियों की ज़रा बात क्या सुनी
फ़रेब ख़ूब हुए ज़िन्दगी के साथ

जहां में सब को ख़ुशी की तलाश है
भटक रहे हैं सभी नाख़ुशी के साथ

हरेक शख़्स को कुत्ते पसन्द हैं
बुराइयां हैं बहुत आदमी के साथ

हमें भी पहली मुहब्बत ने ग़म दिए
मगर मज़े में रहे दूसरी के साथ

– शिवकुमार बिलगरामी

Loading...