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16 Apr 2023 · 1 min read

स्वप्न मन के सभी नित्य खंडित हुए ।

स्वप्न मन के सभी नित्य खंडित हुए ।
दोष जिन पर वही नित्य मंडित हुए ।
आस्थाएँ सभी रक्त रंजित मिलीं –
ज्ञान से जो रहे दूर पंडित हुए ।।

✍️ अरविन्द त्रिवेदी
उन्नाव उ० प्र०

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