Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
16 Apr 2023 · 1 min read

"मोमबत्ती"

“मोमबत्ती”
अपनी लौ में जलती है
हिलती है ना डुलती है
जीवन भर पिघलती है
प्रेम की डोर में
जिससे बन्धती है,
पाने के लिए उसको
बिना रुके जलती है।

Loading...