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15 Apr 2023 · 1 min read

जरूरत

डॉ अरुण कुमार शास्त्री

जुर्म पे जुर्माना भी अक़ीदत
ये ख़ुदा की खुदाई सी हकीकत
मिसाल वो दी जाये जो पूरी उतरे
अधूरी सजी बारात कौन गले से उतरे
मुकर जाते हैं लोग पीठ फिरते ही
अब ऐसी भी तारीफ़ क्या जो झूटी निकले
मिरे ख्वाब मिरी ख्वाहिश को अमल देंगे मिरे ख्वाजा
चढ़ाई है रेशमी चादर अब दुआ पूरी समझें
तत्वज्ञान कभी भी काम करते हैं भरोसा हो जो
आदमी की नियत से नियंत्रित उसकी नियति समझें
पलट कर देखिए मुस्कुरा रहा है चमन अबोध का
दर्द की रात ढलने को चली है तस्सली रखिये

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