बिहारी हु साहिब,बात बिहार की करता हु,,
बिहारी हु साहिब,बात बिहार की करता हु,
गरीब हु,मजदूर हु,दिहाड़ी कही करता हु
बिहार में मेरे काम नही,इसीलिए शहर में भटकता हु,
याद है,मुझे महाराष्ट भी,बात गुजरात की भी करता हु,
बिहारी हु साहिब बात बिहार की करता हु,
गलती, हम में है,या हमारे सरकार में,
समझ हमको आता नही,ऐसा एक नही कई बार हुआ,
हमारी सरकारों को ये पता नही,
धिक्कारे गए,कई राज्यो से हम
और कई बार मैं मरा करता हु,
बिहारी हु साहिब बात बिहार की करता हु,
कही हमको लुटेरा कहते,कही गवाँर कहते है,
जहाँ हमारा आशियाना उसे मजदूरों का बाजार कहते है
चोर,उचक्के,गिरा इंसान न जाने कितने नामो से कहते है,
और फिर भी निर्लज बन कर में परिवार के साथ पेट
अपना भरता हु ,
बिहारी हु साहिब बात बिहार की करता हु
हर बार सोचु अबकी बदलेगा बिहार कंपनियां उधोग धंधे चलेंगे हजार
,यही सोच के वोट के समय गांव जाकर वोटिंग जरूर करता हु,
बिहारी हु,साहिब बात बिहार की करात हु,,