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12 Apr 2023 · 1 min read

कभी उगता हुआ तारा रोशनी बांट लेता है

कभी उगता हुआ तारा रोशनी बांट लेता है
चलता मुसाफिर भी दुख सुख बांट लेता है

तुझे आवाज दे दे कर गला बैठ गया मेरा
एक तू है कि मेरी कोई खबर नहीं लेता है

✍️कवि दीपक सरल

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