"उम्र जब अल्हड़ थी तब
“उम्र जब अल्हड़ थी तब
उसके तक़ाज़े थे अलग।
एक दिल दिन भर में बीसों
बार खो देता था मैं।।”
◆प्रणय प्रभात◆
“उम्र जब अल्हड़ थी तब
उसके तक़ाज़े थे अलग।
एक दिल दिन भर में बीसों
बार खो देता था मैं।।”
◆प्रणय प्रभात◆