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10 Apr 2023 · 1 min read

"बचपने में जानता था

“बचपने में जानता था
कुछ भी पाने का हुनर।
कोई हसरत छेड़ती थी
सिर्फ़ रो देता था मैं।।

◆प्रणय प्रभात◆

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