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10 Apr 2023 · 1 min read

आँख अब भरना नहीं है

दिल उसके नाम अब करना नहीं है
हमें फिर उसपे तो मरना नहीं है

हमें मजबूर ना कर दें वो आँखें
हमें इन बातों से डरना नहीं है

गोगल डाल के गुजरा करो तुम
हमें ये क़लमा अब पढ़ना नहीं है

रखो इल्ज़ाम सब मेरे ही सर पे
हमें अब आप से लड़ना नहीं है

जला डाला वो ख़त ये सोच करके
हमें ये आँख अब भरना नहीं है

~विनीत सिंह शायर/Vinit Singh Shayar

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