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9 Apr 2023 · 1 min read

मुक्तक

221 1221 1221 122

पीना है तो फिर शाम को घर आ के पिया कर
है तुझको कसम ठेके पे मत जा के पिया कर

मैं भी तो तेरे साथ पियूँगी मेरे दिलबर
बाज़ार से कुछ चखना सनम ला के पिया कर

प्रीतम श्रावस्तवी

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