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8 Apr 2023 · 1 min read

जिस सामाज में रहकर प्राणी ,लोगों को न पहचान सके !

जिस सामाज में रहकर प्राणी ,लोगों को न पहचान सके !
उसका जीवन क्या है जीवन ,जो दर्द किसी न बाँट सके !!@परिमल

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