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8 Apr 2023 · 1 min read

मुक्तक-

मुक्तक-
जब तक थे माँ-बाप तो ,मैं था मालामाल।
उनके जाने से हुआ , दीन – हीन कंगाल।
गाँव छोड़, आया शहर, बेचा खेत मकान,
बिना रूह के जिस्म को,रखता कौन संभाल।।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

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