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27 May 2023 · 1 min read

_1_ हाल बुरे हैं शिक्षक के

एम ए बीएड बीटीसी, ये डिग्री बनी दिखाने को।
क ख ग ज्ञान नहीं पर ,साहब चले पढ़ाने को ।
क्या बयां करें हम नुस्खे इनके।
हाल बुरे हैं शिक्षक के।।

कहते हैं साहब लाचार ,पढ़ना-लिखना ये बेकार।
घूम रहे बिन कारोबार, अध्यापन इनका व्यापार।
क्या होगा फिर पढ़-लिख के।
हाल बुरे हैं शिक्षक के।।

बीज मिले जो पके नहीं हैं,किस उपवन के माली हैं।
बैठ डाल पर साख काटते,यूं प्रखर करें रखवाली हैं।
पथ से यह दिखते भटके।
हाल बुरे हैं शिक्षक के।।

गुरु की महिमा धूमिल हैं,प्रतिमा इनकी बोझिल हैं।
उच्चारण भी इनके ऐसे, पढ़े- लिखे या जाहिल हैं।
बैठे हैं हम आशा करके।
हाल बुरे हैं शिक्षक के।।

शिक्षक बैठे मद में चूर, बालक गण शिक्षा से दूर।
बिखर रहे ख्वाबों के नूर,मजदूर बने बालक मजबूर।
देख लिया क्या कुछ करके।
हाल बुरे हैं शिक्षक के।।

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