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5 Apr 2023 · 1 min read

मुक्तक

इक नया संसार देना चाहती हूं।
खुद को थोड़ा प्यार देना चाहती हूं।
तोड़कर के बेड़ियां इन रुढ़ियों की,
स्वप्न को विस्तार देना चाहती हूं।।

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