तुम अगर कांटे बोओऐ
तुम अगर कांटे बोओऐ
तो फूल कैसे उगेंगे
नफरत का पौधा लगा औगे
तो मुहब्बत की फसल कैसे काटोगे
तुम अगर कांटे बोओऐ
तो फूल कैसे उगेंगे
नफरत का पौधा लगा औगे
तो मुहब्बत की फसल कैसे काटोगे