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27 Mar 2023 · 1 min read

■ आज की ग़ज़ल

#ग़ज़ल-
■ इंतज़ार की हद है ना…?
【प्रणय प्रभात】

★बे-शुमार की हद है ना?
हर विचार की हद है ना?

★ पथराई ऑंखें दर पे।
इंतज़ार की हद है ना?

★ ये सरहद वो अनहद है।
आर-पार की हद है ना?

★ आंगन की या दुनिया की।
हर दिवार की हद है ना?

★ दिल में क्या-क्या दफ़नाए?
राज़-दार की हद है ना?

★ एक रोज़ रुख़सत होगी।
इस बहार की हद है ना?

★ कितनी बार इसे जोड़ूँ?
एतबार की हद है ना??

■ प्रणय प्रभात ■

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