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24 Mar 2023 · 1 min read

मुक्तक

ज़िंदगी तब महान लगती है
जब तुम्हारी दुकान लगती है

पान खाने जो आऊँ तो तेरी
आँख ये मेज़बान लगती है

प्रीतम श्रावस्तवी

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