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23 Mar 2023 · 1 min read

सुलगी राख से सहज धूआं निकले l

सुलगी राख से सहज धूआं निकले l
पर मेरे इश्क गम से दुआं निकले ll

मेने जिसको चुना चुना l
बस रहा लोहे का चना ll
जो कभी प्रीत ना समझे l
किस धातु का बना बना ll

सहज जफा की तान तान l
वो रहता बस तना तना ll
रसिक विरह में भी सुख पा l
है जीवन से सना सना ll

लावण्य प्यारा निराला l
प्यास बढाये गुना गुना ll
मेने जिसको चुना चुना l
बस रहा लोहे का चना ll

अरविन्द व्यास “प्यास”

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