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23 Mar 2023 · 1 min read

अब किसे बरबाद करोगे gazal/ghazal By Vinit Singh Shayar

काँपते होठों की फ़रियाद याद करोगे
देख लेना तुम इक रोज हमें याद करोगे

जानते हैं तेरे छोड़ के जाने का सबब हम
इतना बता दो अब किसे बरबाद करोगे

याद आएंगे तुझको मेरे नगमे वो सारे
ग़ैरो के शेर पे जब जब इरशाद करोगे

जाने को जा रहे हो हमें छोड़ कर तो तुम
यादों से अपनी कब हमें आज़ाद करोगे

मेरे सामने जब मेरे ज़ख्मों पे ठहाका है
नम आँख किस तरह फिर मेरे बाद करोगे

~विनीत सिंह

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