Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
24 Feb 2023 · 1 min read

नारीवाद

नारीवाद पर
नित नये
उठते प्रश्न
झकझोरते हैं आत्मा को
पूछते हैं कई सारे प्रश्न
समय सभी को एक नये साँचे में
ढाल देता है
पुरुष और स्त्री दोनों का स्वरूप
परिवर्त्तित होता है
परिपक्व होते हैं हम
नारीवाद पर बहस में तो
खूब बढ़ चढ़ कर
लेते हैं हिस्सा
लेकिन जब नारीवादी
सास बनती हैं
तब बहू वाली
पुरानी मानसिकता क्यों
नहीं होती
क्यों पल प्रतिपल
एक सास बनने की
प्यास बढ़ती ही चली जाती है
आनंद आता है उस वक़्त जब
बहुएँ सास के सामने अपने माता-पिता को
दी जा रही गालियों पर
फफक-फफक कर रोती हैं
रोने पर भी उनकी पिटाई होती है
उन्हें पूरे परिवार वाले रोते देखते हैं
खुश होती हैं-देवियाँ
रो रही है हमारी बहु,
विलाप कर रही है हमारी भाभी
खुश होती हैं ननद देवियाँ
परमानंद में होती हैं
सास-जेठानी
नारीवाद है यह
प्रतिदिन जाने कितनी बहन बेटियाँ
जल रही हैं
पहले प्रताड़ना की आग में
फिर धधकते लौ में,
देवी पर अत्याचार
अनाचार की केंद्रबिंदु
हमेशा से देवी ही रही हैं-नारीवादी।
ढकोसले क्यों
क्यों नारीवाद
बनिए नारीवादी
पर आरंभ
अपने घर से कीजिए
यदि आपके घर में
बहुओं की आंखों में
आँसू नहीं आते
वो हँसती, खिलखिलाती हैं
तो आप सशक्त नारीवादी हैं।
-अनिल कुमार मिश्र

Loading...